Wednesday, 1 December 2021

करें सागवान पौधे की खेती और कमाएं मुनाफा संपर्क करें ग्रीन इंडिया बायो टेक 7250210515

व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए आम तौर पर सागवान की अच्छी किस्म की खेती की जाती है जिसमें कम रिस्क पर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। लगभग 12 सालों में अच्छी सिंचाई, उपजाऊ मिट्टी के साथ वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिेए एक पेड़ से 10 से 20 क्यूबिक फीट लकड़ी हासिल की जा सकती है।

सागवान को इमारती लकड़ी का राजा कहा जाता है जो वर्बेनेसी परिवार से संबंध रखता है। इसका वैज्ञानिक नाम टैक्टोना ग्रांडिस है। इसका पेड़ बहुत लंबा होता है और अच्छी किस्म की लकड़ी पैदा करता है। यही वजह है कि इसकी देश और विदेश के बाजार में अच्छी डिमांड है। सागवान से बनाए गए सामान अच्छी क्वालिटी के होते हैं और ज्यादा दिनों तक टिकते भी हैं। इसलिए सागवान की लकड़ी से बने फर्नीचर की घर और ऑफिस दोनों जगहों पर भारी मांग हमेशा रहती है। पूरी दुनिया में सागवान लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए आम तौर पर सागवान की अच्छी किस्म की खेती की जाती है जिसमें कम रिस्क पर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। लगभग 14 सालों में अच्छी सिंचाई, उपजाऊ मिट्टी के साथ वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिेए एक पेड़ से 10 से 20 क्यूबिक फीट लकड़ी हासिल की जा सकती है। इस दौरान पेड़ के मुख्य तने की लंबाई 22-28 फीट, मोटाई 30-45 ईंच तक हो जाती है। आमतौर पर एक एकड़ में 500 अच्छी क्वालिटी के आनुवांशिक पेड़ तैयार किये जा सकते हैं। इसके लिए सागवान के पौधों के बीच 7/7 फीट का अंतराल रखना होता है।

भारत में सागवान के कई प्रकार हैं 

1. नीलांबर (मालाबार) सागवान 

2. दक्षिणी और मध्य अमेरिकन सागवान

3. पश्चिमी अफ्रीकन सागवान

4. अदिलाबाद सागवान 

5. गोदावरी सागवान

6. कोन्नी सागवान 


सागवान की खेती के लिए उपयुक्त मौसम सागवान के लिए नमी और उष्णकटिबंधीय वातावरण जरूरी होता है। यह ज्यादा तापमान को आसानी से बर्दाश्त कर लेता है। लेकिन सागवान की बेहतर विकास के लिए उच्चतम 39 से 44 डिग्री सेंटीग्रेट और निम्नतम 13 से 17 डिग्री सेंटीग्रेड उपयुक्त है। 1200 से 2500 मिलीमीटर बारिश वाले इलाके में इसकी अच्छी पैदावार होती है। इसकी खेती के लिए बारिश, नमी, मिट्टी के साथ-साथ रोशनी और तापमान भी अहम भूमिका निभाता है। 

सागवान खेती में मिट्टी की भूमिका सागवान की सबसे अच्छी पैदावार जलोढ़ मिट्टी में होती है जिसमे चूना-पत्थर, शीष्ट, शैल, भूसी और कुछ ज्वालामुखीय चट्टानें जैसे कि बैसाल्ट मिली हो। वहीं, इसके विपरीत सूखी बलुवाई, छिछली, अम्लीय (6.0पीएच) और दलदलीय मिट्टी में पैदावार बुरी तरह प्रभावित होती है। सॉयल पीएच यानी मिट्टी में अम्लता की मात्रा ही खेती के क्षेत्र और विकास को निर्धारित करती है। सागवान के वन में सॉयल पीएच का रेंज व्यापक है, जो 5.0-8.0 के 6.5-7.5 बीच होता है। 

सागवान खेती में कैल्सियम की भूमिका कैल्सियम, फोस्फोरस, पोटैशियम, नाइट्रोजन और ऑर्गेनिक तत्वों से भरपूर मिट्टी सागवान के लिए बेहद मुफीद है। कई शोध परिणाम बताते हैं कि सागवान के विकास और लंबाई के लिए कैल्सियम की ज्यादा मात्रा बेहद जरूरी है। यही वजह है कि सागौन को कैलकेरियस प्रजाति का नाम दिया गया है। सागवान की खेती कहां होगी इसको निर्धारित करने में कैल्सियम की मात्रा अहम भूमिका निभाती है। साथ ही जहां सागौन की मात्रा जितनी ज्यादा होगी उससे ये भी साबित होता है कि वहां उतना ही ज्यादा कैल्सियम है। जंगली इलाकों में जहां नर्सरी स्थापित की जाती है वो बेहद ऊर्वरक होती है और उसमे अलग से खाद मिलाने की जरूरत नहीं होती है। 


ग्रीन इंडिया बायो टेक में सागवान पौधारोपन सागवान की नर्सरी के लिए हल्की ढाल युक्त अच्छी सूखी हुई बलुई मिट्टी वाला क्षेत्र जरूरी होता है। नर्सरी की एक क्यारी 1.2 मीटर की होती है। इसमे0.3 मी.से 0.6मी की जगह छोड़ी जाती है। साथ ही क्यारियों की लाइन के लिए 0.6 से 1.6 मी. की जगह छोड़ी जाती है। एक क्यारी में 400-800 तक पौधे पैदा होते हैं। इसके लिए क्यारी की खुदाई होती है। इसे करीब 0.3 मी. तक खोदा जाता है और जड़, खूंटी और कंकड़ को निकाला जाता है। जमीन पर पड़े ढेले को अच्छी तरह तोड़ कर मिला दिया जाता है। इस मिट्टी को एक महीने के लिए खुला छोड़ दिया जाता है और उसके बाद उसे क्यारी में बालू और ऑर्गेनिक खाद के साथ भर दिया जाता है। नमी वाले इलाके में जल जमाव को रोकने के लिए जमीन के स्तर से क्यारी को 30 सेमी तक ऊंचा उठाया जाता है। सूखे इलाके में क्यारी को जमीन के स्तर पर रखा जाता है। खासकर बेहद सूखे इलाके में जहां 750 एमएम बारिश होती है वहां पानी में थोड़ी डूबी हुई क्यारियां अच्छा रिजल्ट देती है। एक मानक क्यारी से जो कि 12 मी. की होती है उसमे करीब 3 से 12 किलो बीज इस्तेमाल होता है। 

सागवान की रोपाई के तरीके फैलाकर या छितराकर और क्रमिक या डिबलिंग तरीके से 5 से 10 फीसदी अलग रखकर बुआई की जाती है। क्रमिक या डिबलिंग तरीके से बुआई ज्यादा फायदेमंद होता है अच्छी और मजबूती से बढ़ने वाली होती है। आमतौर पर क्यारियों को उपरी शेड की जरूरत नहीं होती है। सिवा बहुत सूखे इलाके के जहां सिंचाई की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती है। ऐसे हालात में यहां खर-पतवार भी नहीं पनप पाता है।

सागवान रोपन में जगह का महत्व सागवान का रोपन 2m x 2m, 2.5m x 2.5m या 3m x 3m के बीच होना चाहिये। इसे दूसरी फसलों के साथ भी लगाया जा सकता है, लेकिन उसके लिए 4m x 4m या 5m x 1m का गैप या अंतराल रखना जरूरी है। 

सागवान रोपन में जमीन की तैयारी और खेती एवं सावधानियां सागवान के पौधारोपन के लिए जगह चौरस या फिर हल्की ढलान वाला हो (जिसमे अच्छे से पानी निकलने की व्यवस्था हो)। शैल और शीस्ट से युक्त मिट्टी सागौन के लिए अच्छा होता है। सागौन की अच्छी बढ़त के लिए जलोढ़ मिट्टी वाला क्षेत्र बहुत अच्छा माना जाता है। वहीं, लैटेराइट या उसकी बजरी, चिकनी मिट्टी, काली कपासी मिट्टी, बलुई और बजरी सागवान के पौधे के लिए अच्छा नहीं होता है। पौधारोपन के लिए पूरी जमीन की अच्छी जुताई, एक लेवल में करना जरूरी होता है। पौधारोपन की जगह पर सही दूरी पर एक सीध में गड्ढा खुदाई जरूरी होता है। सागवान रोपन के लिए कुछ जरूरी बातें- पूर्व अंकुरित खूंटी या पॉली पॉट का इस्तेमाल करें 45 cm x 45 cm x 45 cm की नाप के गड्ढे की खुदाई करें। मिट्टी में मसाला, कृषि क्षेत्र की खाद और कीटनाशक को दोबारा डालें। साथ ही बजरी वाले इलाके के खोदे गए गड्ढे में ऑर्गेनिक खाद युक्त अच्छी मिट्टी डालें। पौधारोपन के दौरान गड्ढे में 100 ग्राम खाद मिलाएं और उसके बाद मिट्टी की ऊर्वरता को देखते हुए अलग-अलग मात्रा में खाद मिलाते रहें सागवान की खेती के लिए सबसे अच्छा मौसम मॉनसून का होता है, खासकर पहली बारिश का वक्त पौधे की अच्छी बढ़त के लिए बीच-बीच में मिट्टी की निराई-गुड़ाई का भी काम करते रहना चाहिए, पहले साल में एक बार, दूसरे साल में दो बार और तीसरे साल में एक बार पर्याप्त है। पौधारोपन के बाद मिट्टी की तैयारी को अंतिम रुप दें और जहां जरूरी है वहां सिंचाई की व्यवस्था करें। शुरुआती साल में खर-पतवार को हटाने का काम करना सागौन की अच्छी बढ़त को सुनिश्चित करता है।

खर-पतवार का नियंत्रण सागवान के पौधारोपन के शुरुआती दो-तीन सालों में खर-पतवार नियंत्रण पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। नियमित अंतराल पर खतर-पतवार हटाने का अभियान चलाते रहना चाहिए। पहले साल में तीन बार, दूसरे साल में दो बार और तीसरे साल में एक बार ये अभियान अच्छी तरह चलाना आवश्यक है। यहां ध्यान रखनेवाली बात ये है कि सागवान ऐसी प्रजाति का पेड़ है जिसकी वृद्धि और विकास के लिये सूर्य की पर्याप्त रोशनी जरूरी है। 

सागवान खेती में सिंचाई की तकनीक शुरुआती दिनों में पौधे की वृद्धि के लिए सिंचाई बेहद अहम है। खर-पतवार नियंत्रण के साथ-साथ सिंचाई भी चलती रहनी चाहिए जिसका अनुपात 3,2,1है। इसके साथ ही मिट्टी का भी काम चलते रहना चाहिए। अगस्त और सितंबर महीने में दो बार खाद डालना चाहिए। लगातार तीन साल तक प्रत्येक पौधे में 50 ग्राम एनपीके (15:15:15) डाला जाना चाहिए। नियमित तौर पर सिंचाई और पौधे की छंटाई से तने की चौड़ाई बढ़ जाती है। ये सब कुछ पौधे के शीर्ष भाग के विकास पर निर्भर करता है जैसे कि प्रति एकड़ वृक्षों की संख्या में कमी। दूसरे शब्दों में अधिक ऊंचाई वाले पौधे लेकिन कम संख्या या फिर कम ऊंचाई वाले पौधे लेकिन संख्या ज्यादा। सिंचाई सुविधायुक्त सागौन के पेड़ तेजी से बढ़ते हैं लेकिन वहीं, रसदार लकड़ी की मात्रा बढ़ जाती है। ऐसे में पौधे का तना कमजोर हो जाता है और हवा से इसे नुकसान पहुंचता है। ऐसे में पौधे में पानी के फफोले बनने लग जाते हैं। ऐसे पेड़ बाहर से दिखने में मजबूत दिखते हैं लेकिन पानी के जमाव की वजह से पैदा हुए फंगस की वजह से अंदर से खोखला हो जाता है। सागवान की खेती में पौधे आमतौर पर 13 से 40 डिग्री तापमान के बीच अच्छी तरह से बढ़ते हैं। प्रत्येक साल 1250 से 3750 एमएम की बारिश इसकी खेती के लिए पर्याप्त है। वहीं, अच्छी गुणवत्ता वाले पेड़ के लिए साल में चार महीना सूखा मौसम चाहिए और इस दौरान 60 एमएम से कम बारिश ही अच्छी होती है। पेड़ के बीच अंतर, तने की काट-छांट की टाइमिंग से पौधे के विकास पर फर्क पड़ता है। कांट-छांट में अगर देरी की गई या फिर पहले या ज्यादा कांट-छांट की जाती है तो इससे भी इसकी खेती पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। 

सागवान की खेती में कटाई-छंटाई का महत्व आमतौर पर सागवान के पौधे की कटाई-छटाई पौधा रोपन के पांच से दस साल के बीच की जाती है। इस दौरान जगह की गुणवत्ता और पौधों के बीच अंतराल को भी ध्यान में रखा जाता है। वहीं अच्छी जगह और नजदीकी अंतराल (1.8×1.8 m और 2×2) वाले पौधे की पहली और दूसरी कटाई-छंटाई का काम पाचवें और दसवें साल पर की जाती है। दूसरी बार कटाई-छंटाई के बाद 25 फीसदी पौधे को विकास के लिए छोड़ दिया जाता है। 


सागवान पौधारोपन के बीच अंतर फसल शुरुआती दो साल के दौरान सागौन की खेती के बीच में अंतर फसल उगाई जाती है खासकर वहां जहां कृषि योग्य भूमि है। एक बार जब भूमि को पट्टे पर दे दिया जाता है तो पट्टेदार भूमि की सफाई, खूंटे जलाना और पौधारोपन का काम शुरु कर देता है। सागवान की खेती के बीच में आमतौर पर गेहूं, धान, मक्का, तिल और मिर्च के साथ-साथ सब्जी की खेती की जाती है। कुछ फसल जैसे कि गन्ना, केला, जूट, कपास, कद्दू, खीरा की खेती नहीं की जाती है। 

सागवान की खेती में समस्याएं निष्पत्रक और दीमक जैसे कीट बढ़ रहे सागवान के पौधे को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। सागवान के पौधे में आमतौर पर पॉलिपोरस जोनालिस लग जाता है जो पौधे की जड़ को गला देते हैं। गुलाबी रंग का फंगस पौधे को खोखला कर देते हैं। ओलिविया टेक्टोन और अनसिनुला टेक्टोन की वजह से पाउडर जैसे फफूंद पैदा हो जाते हैं जिससे असमय पत्ता झड़ने लगता है। इसके बाद पौधे के सुरक्षा के लिए रोगनिरोधी उपाय करना जरूरी हो जाता है। केलोट्रोपिस प्रोसेरा, डेट्यूरा मेटल और अजादिराचता इंडिका के ताजा पत्तों के रस इन रोगों से लड़ने में बेहद कारगर साबित होते हैं। जैविक और अकार्बनिक खाद के मुकाबले इससे हानिकारक कीट को अच्छी तरह से खत्म किया जाता है और साथ ही यह पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाता है।

सागवान की पैदावार 13 साल के दौरान एक सागवान का पेड़ 10 से 20 क्यूबिक फीट लकड़ी देता है। सागवान का मुख्य तना आमतौर पर 25 से 30 फीट ऊंचा होता है और करीब 35 से 45 इंच मोटा होता है। एक एकड़ में उन्नत किस्म के करीब 500 सागौन का पेड़ पैदा होता है। इसके लिए पौधारोपन के दौरान 7/7 फीट का अंतराल रखना जरूरी होता है। 

सागवान की मार्केटिंग सागवान के लिए बाजार में बेहद मांग है और इसे बेचना भी बेहद आसान है। इसके लिए बाय बैक योजना के अलावा स्थानीय टिंबर मार्केट भी होते हैं। घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बेहद मांग होने की वजह से सागवान की खेती बेहद फायदेमंद है।

Saturday, 9 October 2021

Defraying the Agricultural Damages — the need of Plantation Company in Patna, India



In a vast tropical country like India, the range of climate that the entire terrain encounters is varied. Different types of fertile soils and different types of suitable weather make this land produce a variety of crops and plants throughout the year. This is one of the reasons why plantation in India has been the backbone of the country’s economy for thousands of years.

In the recent times, however, the farmers of India have faced lack of improvisations required in the agricultural domain. Undesirable results, loss of money, effort and time have hindered the growth very badly. While usage of technological innovations has helped developed countries like USA and Australia to increase the production of crops quite significantly. This is where the role of Plant Company in Patna India becomes pivotal. They need to step up with efficient and feasible strategies that can help the farmers build their trust in plantation and defray the damages happening in the country. While these ideas should be economically driven on one hand, on the other they should progressive and must have a positive impact on the overall development of the people of the country.

Considering that majority of farmers live in villages and they are not equipped with technical knowledge involved in plantation, it is essential that Plantation Companies in Patna provide technical services directly to the farmers. For example, the process of replacement of Mortality plants is one thing that can channelise the thought process of the farmers in a big way. Similarly, on-farm demonstration and technical guidelines of agri-products can help farmers reap higher yields. Moreover, setting up of a telephonic advisory services can give them the opportunity to counsel with the plantation experts at any given time, which can significantly help in preventing the damages that otherwise would have been an inevitable. In addition, promoting organic farming can also be a masterstroke policy if it is initiated by the government in collaboration with different Plantation Company of the country.

When it comes to a real-time or online Plant Company in Patna, GREEN INDIA BIO TECH is leading the way with its innovative initiative of marrying the conventional farming of India with the modern systems of farming. The team delivers quality expertise both on-farm and online, and provides quality trees like Sagwan Plant, Mahogany Plant in Patna, Mango Plant, Chandan Plant etc. for your farms with necessary guidelines to get better growth and higher returns.

Thursday, 26 August 2021

सागवान की खेती से फायदे और कीमत। कॉल करे 7250210515 ग्रीन इंडिया बायो टेक

सागवान की खेती से फायदे और कीमत

सागवान की खेती से होनेवाले फायदे और कीमत जानकर आप भी हैरान रह जाओगे और आपका भी मन सागवान की खेती करने के बारें में ज़रूर सोचेगा। 

हम में से कई लोग ऐसे हे जिनके पास थोड़ी बहुत जमीन होती है। मगर उस ज़मीन में हम फसल ले नहीं सकते या फिर लेना नहीं चाहते। या फिर यूँ कहूं तो हमें खेती के बारें में सही जानकारी नहीं होती। 

या तो कुछ संजोग में हम शहर में नौकरी करते है इस वजह से हमारी इच्छा हो कर भी हम खेती का काम कर नहीं सकते। तो निश्चिंत होकर इस लेख को पढ़ने के बाद आप सागवान खेती से होनेवाले फायदे और उन लकड़ी की कीमत और इनसे होने वाले मुनाफे के बारें में ज़रूर जानोगे। 

इस लेख में आप जानोगे आप किस प्रकार से थोडी सी जमीन में खेती करके कुछ ही सालों में लाखों रूपये कमा सकतें है। तो चलिए जानते है के सागवान खेती से होनेवाले फायदे और उन लकड़ी की कीमत के बारें में। 

सागवान की जानकारी :


सागवान का वानस्पतिक नाम क्या है?

सागवान का वानस्पतिक नाम: "TECTONA GRANDIS" है।

सागवान भी आम पेड़ों की तरह एक विशालकाय वृक्ष है। सागवान के पेड़ की उम्र करीब 200 साल तक होती है। 

सागवान की लकड़ी बहोत ही मजबूत और कीमती होती है। इस पर पॉलिश बहोत जल्दी चड जाती है । इससे यह दूसरी लकड़ी की तुलना में दिखने में अधिक आकर्षक दिखती है। 

सागवान की लकड़ी कम सिकुड़ती है । इसकी मज़बूती इतनी होती है की कई साल पुरानी इमारतों में भी यह लकड़ी ज्यों की त्यों  पाई गई है । ख़ास कर हमारी स्कूलों में बने चम चमाते टेबल और खुर्सी आम तौर पे इसी सागवान की लकड़ी से बनि हुवी होती है। 

सागवान की लकड़ी को दीमक से कोई नुकसान नहीं होता। सागवान की लकड़ी का उपयोग जहाजों, नावों, मकानों की खिड़कियों, दरवाजों  और फर्नीचर के निर्माण में होता है। 

पुरे भारत में सागवान की खेती होती है। आम तौर पे सागवान की खेती 550 से 1100 फिट की ऊंचाई तक की जाती है। तो सागौन वृक्ष 550 से 1100 फिट की ऊंचाई पर उपलब्ध होते हैं। 

पिछले कई दशकों में  जंगलों से  सागवान की कटाई इतनी तेजी से हुई के जंगलों से पेड़ गायब होते जा रहे हैं, और इस पर भी सागवान की लकड़ी की गुणवत्ता और मांग को देखते हुए सागौन की कीमत और मांग भी तेजी से बढ़ती जा रही है।  

सागवान की लकड़ी को ना तो दीमक लगती है, और ना ही वह पानी में खराब होती है। इसीलिए सागवान की लकड़ी का इस्तेमाल महंगी वस्तुएं बनाने में  होता है। 


सागवान के पौधे कैसे उगाएं:

सागवान के पौधे को लगाने के लिए जून से अक्टूबर का महीना बहुत खास होता है। मगर यदि आप चाहो तो इसे पूरे साल कभी भी लगा सकते हो।

पूरे साल इसे बढ़ने में किसी भी तरह की परेशानी नहीं होती। मगर दूसरे मौसम के मुकाबले सर्दी का मौसम में इसे लगाना अच्छा नहीं होता। क्योकि सर्दी में इसका ग्रोथ कम होता है। 

इसके अलावा यदि जमीन ज्यादा पानी वाले और बाढ़ वाले इलाके में है तो सागवान के पौधे को बारिश के मौसम के बाद ही लगाना चाहिए। 

सागवान के पौधे को लगाने के लिए मिट्टी की जांच कैसे करें:

खेत पर आप सागवान का पेड़ लगाना चाहते हो तो उस मिट्टी की जांच आप पहले जरूर करवा लें।  मिट्टी की जांच रिपोर्ट अगर पीएच वैल्यू ( PH Value ) 6.50 से 8.50 के बीच आती है तभी यहाँ मिट्टी सागवान की खेती के लिए उत्तम होती है। 

सागवान को  कितने पानी की जरूरत होती है:

जब यह पौधा छोटा हो तब इसे पहले 1 महीने में रोजाना पानी की जरूरत होती है। बारिश के मौसम में बरसाती पानी इसे काफी होता है और सर्दी के मौसम में  महीने में एक बार ही इसे  पानी की जरूरत होती है। उसके बाद 1 साल में हफ्ते में एक बार ही इसे पानी की जरूरत पड़ती है। 

सागवान को किससे होता है खतरा:

सागवान के पौधे को उस जमीन में बिल्कुल ना लगाएं जो पानी से भरा रहता है। इसके अलावा इसे कीड़े लगने का और दीमक का भी खतरा रहता है। इन  सभी से बचने के लिए कॉन्ट्रैक्ट करने वाली कंपनी ट्रेनिंग देती है। 

ध्यान रहे सागवान के पौधे को दीमक लग सकती है, लेकिन जब इस लकड़ी का फर्नीचर बन के तैयार हो जाता है तभी से दीमक नहीं लगती। यही इस लकड़ी की खासियत है। 

सागवान की खेती के लिए कितना खर्च होता है :

1 एकड़ जमीन में सागवान के 500  पौधे लगा सकते हैं। सागवान के पौधे को लगाने के लिए इसके पौधे आपको ग्रीन इंडिया बायो टेक से  मिल जाएंगे। इस पौधे अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग कीमत पर मिलते हैं। मगर देखा जाए तो सागवान का एक पौधा ₹ 130  से लेकर ₹ 150  तक मिलता है। 

विश्वस्तरीय पौधा सप्लायर कंपनी ग्रीन इंडिया बायो टेक से सागवान की पौधे लेने में यह फायदा है के इन पौधों के साथ 1  साल की रिप्लेसमेंट  गेरंटी यह कंपनी वाले देते हैं। यदि एक साल के भीतर आप के पौधे किसी  वजह से खराब हुए या मर गए तो कंपनी बिना किसी खर्च के आपको यह पौधे फिर से उपलब्ध कराती है। आपको सागवान के पौधे लगाने हो तो इसे लगाने के लिए एक फिट की दूरी 10 *9 तक रखें यह दूरी सागवान के पौधे के लिए उत्तम होती है। 

क्या सागवान के साथ दूसरी फसल  लेना संभव है:

बिल्कुल  संभव है आप अगर अपने खेत पर कोई फसल लगाने के साथ-साथ सागवान की खेती भी करना चाहते हैं तो आपको  खेत की मेड पर सागवान का पौधा लगाना होगा। 

किन किन राज्यों में सागवान की अच्छी फसल होती है:

सागवान के पौधे को वैसे तो कहीं भी लगाया जा सकता है।  मगर भारत में बर्फ वाले राज्यों में जैसे जम्मू कश्मीर हिमाचल प्रदेश के कुछ इलाकों में  इसे नहीं लगाया जा सकता। इसके अलावा समुद्र किनारे बसे शहरों में समुद्र से करीब 30 किलोमीटर दूर सागवान को लगाया जा सकता है। 

सागवान का पेड़ कितने साल में बिकने लायक हो जाता है:

सागवान का टिश्यू कल्चर  डीप  इर्रीगेशन 12  से 15  साल तक तैयार हो जाता है। लेकिन फिर भी अगर 12 साल के पेड़ की गोलाई  3 फिट यानि 36 इंच हो जाए तब यह  बेचने लायक हो जाता है। 

सागवान की खेती से फायदे कीमत और कमाई :

सागवान की  कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग करने वाली कंपनियां 2500 क्यूबिग फिट तक कीमत लेती है। एक पेड़ पर 10  से 12  क्यूबिक फीट तक लकड़ी निकल आती है। सागवान की खेती से  12 * 2500  = 30,000 तक  एक पेड़ की कीमत होगी। इस हिसाब से 1  एकड़ में 500 पेड़ लगाने पर इन सभी की कुल कीमत 500 * 30,000 किया जाए तो 1. 5 करोड़ तक होगी। 

1 एकड़ खेत की मेड की औसत लंबाई और चौड़ाई 200 गुना 220 होती है। जिस पर करीब 150 पौधे लगाए जा सकते हैं लेकिन  मेड पर 10 * 9 फीट की दूरी पर नहीं बल्कि 6  बाई 6 फीट की दूरी पर लगेंगे। 

सागवान 150/- पेड़  की कीमत ₹ 19,500/-  प्रति पेड़ करीब 12 साल के बाद करीब 60 लाख रुपए के होगे। 

सागवान  के पेड़ को कहाँ बेचें:

1. सागवान की लकड़ी खरीदने वाले  किसी कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट कर लिया जाए। 

2. किसी भी शहर के खुले बाजार में इसे बेच सकते हैं।  

आपने देखा सागवान की खेती हमें कैसे उपयोगी हो सकती है। मेने इस लेख में सागवान के विषय में विस्तार से जानकारी देने की कोशिश  की है। 


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यदि सागवान के बारें में आपका कोई सवाल हो तो निचे कमैंट्स में पूछ सकते है या कॉल कर सकते है 7250210515 पे आशा करता हूँ आपको सागवान खेती से होने वाले फायदे और कीमत के बारें में यह जानकारी उपयोगी लगी होगी। 

Tuesday, 17 August 2021

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